क्या अब ओम बिड़ला की शामत आ गई है? 

पिछले कई वर्षों से भारतीय संसद में संविधान की जिस तरह तौहीन लोकसभाध्यक्ष ओम बिड़ला कर रहे हैं लगता है अब चापलूसी का वे दूसरा इतिहास लिखने जा रहे हैं। आपको याद होगा राज्य सभा में देश के उपराष्ट्रपति जो अध्यक्ष होते हैं कितना समर्पित व्यवहार पीएम के लिए रखा। लेकिन उनका अंत कितना बुरा हुआ यह सभी जानते हैं। एक जाट का इस तरह का आचरण जाटों में भी चर्चित रहा यही वजह है जब उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूटा तो उन्हें गुप्त आवास में  रहना पड़ा।

ऐसा ही कुछ कुछ पीएम के लिए हां जू हां जू करने वाले ओम बिड़ला ने कर दिया है कि सदन में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव मंजूर हुआ है जिस पर मार्च में बहस होना संभावित है। यानि तब तक वे सदन से दूर रहेंगे। यदि अविश्वास प्रस्ताव गिरता तभी वे वापसी कर पाएंगे।

सच यह भी है कि संसद के बजट सत्र में आए दिन हंगामा देखने को मिल रहा है। इसी बीच, अब मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन के कामकाज में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। विपक्ष के सांसदों ने स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ लोकसभा महासचिव को रूल 94(सी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। इस नोटिस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि इस पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं। अविश्वास प्रस्ताव के लिए मात्र 50 सांसदों के हस्ताक्षर ज़रूरी होते हैं।

लोकसभा स्पीकर के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर राहुल गांधी द्वारा हस्ताक्षर नहीं करने को लेकर कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि नेता विपक्ष की मर्यादा के मद्दे नजर ऐसा किया गया है।

इससे पहले जब राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, तब राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किए थे।

ओम बिड़ला के ख़िलाफ़ यह प्रस्ताव राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को सदन में बोलने से रोकने के लिए दिया गया है। इसके साथ ही इसमें आठ सांसदों के निलंबन का मुद्दा भी उठाया गया है। आश्चर्यजनक तो यह है कि ओम बिड़ला लोकसभाध्यक्ष ने पीएम को सदन में आने से यह कहकर मना कर दिया कि सदन में उन्हें ख़तरा है। सदन का हेड इस तरह कह रहा है यानि वह सदन के अध्यक्ष बनने के काबिल नहीं है।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “पूरे सत्र में जो काम हो रहा है वो संविधान के मुताबिक नहीं है। आप जानते हैं लोकतंत्र में सबसे बड़ी जगह संसद है। अगर वहां विपक्ष के नेता को ही बात करने से रोका जाएगा तो फिर बाकी क्या बात की जाए? जनतंत्र के मूल पर ही चोट पहुंचाई जा रही है।”

कुल मिलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर जब बहस होगी। बिड़ला मौजूद नहीं होंगे।भाजपा का दुलारा बिड़ला बचेगा या नहीं यह सांसदों पर निर्भर होगा। बहुमत भाजपा का जेडीयू और तेलगूदेशम से पूरा होता है यदि कुछ गड़बड़ी हुई तो उनका पतन सुनिश्चित है। भाजपा के अंदर से आ रही ख़बरें बता रही हैं कि बिड़ला की वापसी मोदी जी भी नहीं चाहते हैं। अपनी कायर प्रधानमंत्री की छवि को दुरुस्त करने के लिए वे ओम बिड़ला की बलि भी दे सकते हैं।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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